Vikas Dubey: जो खुद बन गया था काल, उसे क्यों बचाते महाकाल – vikas dubey encounter kanpur case ujjain mahakal temple transit remand

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  • पकड़े जाने पर मां ने कहा था- महाकाल ने बचा लिया
  • पुलिस टीम पर हुए हमले का मुख्य आरोपी था विकास

कानपुर के कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे को पुलिस ने शुक्रवार को एनकाउंटर में मार गिराया. जिस विकास दुबे की तलाश में उत्तर प्रदेश पुलिस और एसटीएफ की 40 टीमें लगातार छापेमारी कर रही थीं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद हर रेड की जानकारी ले रहे थे. घंटों में इनामी राशि बढ़ाई जा रही थी, उस विकास ने सामने आने के लिए कड़ी सुरक्षा वाले सीसीटीवी कैमरों से लैस मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर को चुना था.

विकास दुबे को गुरुवार के दिन ही उज्जैन के महाकाल मंदिर से पकड़ा गया था. विकास के पकड़े जाने के बाद विकास की मां ने कहा था कि वह हर साल महाकाल मंदिर जाता था. महाकाल ने ही उसे बचाया है. लेकिन जो खुद ही काल बन गया था, उसे महाकाल क्यों बचाते? यूपी पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने विकास दुबे को एनकाउंटर में ढेर कर दिया.

नहीं बचा पाई मां की पूजा

विकास दुबे को जब पुलिस टीम ट्रांजिट रिमांड पर उज्जैन से लेकर कानपुर आ रही थी, शुक्रवार की सुबह से ही विकास की मां पूजा पर बैठी थीं. मां की पूजा भी बेटे की जान नहीं बचा पाई. गौरतलब है कि पुलिस की थ्योरी के अनुसार विकास की कार तेज बारिश के कारण स्किड होकर डिवाइडर से टकराकर सड़क पर ही पलट गई. इसके बाद विकास दुबे ने घायल पुलिसकर्मियों के हथियार छीनकर भागने की कोशिश की.

बीच सड़क पर गाड़ी पलटी, हथियार छीनकर भागने की कोशिश कर रहा था विकास दुबे

पुलिस के मुताबिक विकास दुबे को पकड़ने के लिए कॉम्बिंग की गई. उससे सरेंडर करने को कहा गया, लेकिन उसने फायरिंग शुरू कर दी. जवाबी कार्रवाई में विकास दुबे को यूपी पुलिस और एसटीएफ की जवाबी कार्रवाई में वह मार गिराया गया. अभी एक दिन पहले ही विकास का दाहिना हाथ माना जाने वाला अमर दुबे भी पुलिस की गाड़ी पंक्चर होने के बाद भागने की कोशिश में मारा गया था.

पुलिस की थ्योरी पर उठ रहे सवाल

पुलिस की थ्योरी पर सवाल भी उठने लगे हैं. ऐसा क्या हुआ कि जो विकास एक दिन पहले ही महाकाल मंदिर के बाहर चिल्लाकर अपना परिचय बता रहा था, अपने गृह जिले की सीमा में दाखिल होते ही भागने की कोशिश करने लगा? गौरतलब है कि विकास दुबे कानपुर में 2 जुलाई की देर रात दबिश देने गई पुलिस टीम पर हमले का मुख्य आरोपी था. पुलिस टीम पर हुए बर्बर हमले में क्षेत्राधिकारी (सीओ) देवेंद्र मिश्र समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे. उस पर पांच लाख का इनाम घोषित किया था.

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