गांव-कस्बे आत्मनिर्भर होते तो आज ये हालात न होते, मन की बात में बोले पीएम मोदी – Pm modi mann ki baat migrant labour self reliance

  • पूर्वी हिस्से का विकास आवश्यक
  • आत्मनिर्भर होते तो हालात ऐसे ना होते

लॉकडाउन के दौरान सबसे अधिक प्रभावित समूह अगर कोई है तो वह है प्रवासी मजदूर. पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ रेडियो कार्यक्रम के 65वें भाग में मजदूरों की स्थिति पर दुख जाहिर किया. पीएम मोदी ने कहा कि हमारे देश में भी कोई वर्ग ऐसा नहीं है जो कठिनाई में न हो, परेशानी में न हो और इस संकट की सबसे बड़ी चोट अगर किसी पर पड़ी है तो वो हैं हमारे गरीब, मजदूर, श्रमिक वर्ग. उनकी तकलीफ, उनका दर्द, उनकी पीड़ा शब्दों में नहीं कही जा सकती.

पीएम ने कहा, जो दृश्य आज हम देख रहे हैं, इससे देश के अतीत में जो कुछ हुआ, उसके अवलोकन और भविष्य के लिए सीखने का अवसर भी मिला है. आज, हमारे श्रमिकों की पीड़ा में, देश के पूर्वीं हिस्से की पीड़ा को देख सकते हैं. उस पूर्वी हिस्से का विकास बहुत आवश्यक है.

केंद्र सरकार ने अभी जो फैसले लिए हैं, उससे गांवों में रोजगार, स्वरोजगार, लघु उद्योगों से जुड़ी विशाल संभावनाएं खुली हैं. अगर, हमारे गांव, कस्बे, जिले, राज्य, आत्मनिर्भर होते, तो अनेक समस्याओं ने वो रूप नहीं लिया होता, जिस रूप में वो आज हमारे सामने हैं.

जैसे, कहीं श्रमिकों की स्किल मैपिंग का काम हो रहा है, कई स्टार्टअप इस काम में जुटे हैं, कहीं माइग्रेशन कमीशन बनाने की बात हो रही है. मुझे पूरा भरोसा है आत्मनिर्भर भारत अभियान, इस दशक में देश को नई ऊंचाई पर ले जाएगा.

हमारे देश में, करोड़ों गरीब, दशकों से एक बहुत बड़ी चिंता में रहते आए हैं कि अगर बीमार पड़ गए तो क्या होगा? इस तकलीफ को समझते हुए, इस चिंता को दूर करने के लिए ही करीब डेढ़ साल पहले आयुष्मान भारत योजना शुरू की गई थी.

मन की बात में बोले PM मोदी- देश अब खुल गया है, ज्यादा सतर्क रहें

कुछ ही दिन पहले, आयुष्मान भारत के लाभार्थियों की संख्या एक करोड़ के पार हो गई है. एक करोड़ से ज्यादा मरीज, मतलब, नॉर्वे जैसा देश, सिंगापुर जैसा देश, उसकी जो कुल जनसंख्या है, उससे, दो गुना लोगों को मुफ्त में इलाज दिया गया है.

आयुष्मान भारत योजना के 1 करोड़ लाभार्थियों में से करीब 80 प्रतिशत लाभार्थी ग्रामीण इलाके के हैं. इसमें से भी करीब 50 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं-बेटियां हैं. इन लाभार्थियों में ज्यादातर ऐसी बीमारी से पीड़ित थे, जिनका इलाज सामान्य दवाओं से संभव नहीं था.

आयुष्मान भारत योजना के साथ एक बड़ी विशेषता पोर्टेबिलिटी की सुविधा भी है. पोर्टेबिलिटी ने देश को, एकता के रंग में रंगने में भी मदद की है. यानी बिहार का कोई गरीब अगर चाहे तो, उसे कर्नाटक में भी वही सुविधा मिलेगी, जो उसे, अपने राज्य में मिलती है.

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उन्होंने कहा कि देश में सबके सामूहिक प्रयासों से कोरोना के खिलाफ लड़ाई बहुत मजबूती से लड़ी जा रही है. हमारी जनसंख्या ज्यादातर देशों से कई गुना ज्यादा है, फिर भी हमारे देश में कोरोना उतनी तेजी से नहीं फैल पाया, जितना दुनिया के अन्य देशों में फैला.

पीएम ने आगे कहा कि कोरोना से होने वाली मृत्यु दर भी हमारे देश में काफी कम है. जो नुकसान हुआ है, उसका दु:ख हम सबको है, लेकिन जो कुछ भी हम बचा पाए हैं, वो निश्चित तौर पर देश की सामूहिक संकल्पशक्ति का ही परिणाम है.

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आखिर में पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई अब भी उतनी ही गंभीर है . आपको, आपके परिवार को, कोरोना से अभी भी उतना ही गंभीर खतरा हो सकता है. अगले महीने, फिर एक बार, ‘मन की बात’ अनेक नए विषयों के साथ जरूर करेंगे.

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