Public Transport In India After Lockdown Commuting Patterns Delhi Public Transport In Delhi Metro Delhi Metro Daily Commuters Public Transport Bus In Delhi Personal Vehicle Usage Centre For Science And Environment – बढ़ सकता है निजी वाहनों का इस्तेमाल, मेट्रो और बस का उपयोग कम होगा: सीएसई की रिपोर्ट

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– फोटो : अमर उजाला

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रिपोर्ट के मुताबिक इस अध्ययन में 400 से अधिक मध्यम और उच्च मध्यम वर्ग के यात्रियों के आने-जाने के पैटर्न और प्राथमिकताओं के आधार पर विश्लेषण किया गया। जिससे पता चलता है कि वायरस संक्रमण को फैलने के लिए रोकने के लिए 25 मार्च से लागू हुए लॉकडाउन से पहले, दिल्ली में 37 फीसदी यात्री मेट्रो के जरिए सफर करते थे, 28 फीसदी यात्रियों ने निजी वाहनों का उपयोग किया और 7 फीसदी यात्रियों ने सार्वजनिक बसों का इस्तेमाल किया। 
6 महीनों में इस बदलाव की आशंका
अगले छह महीनों में, दिल्ली मेट्रो में सवारियों की संख्या 37 फीसदी से कम होकर 16 फीसदी रह जाने की आशंका है। सार्वजनिक बसों में यात्रियों की संख्या 7 फीसदी से घटकर सिर्फ 1 फीसदी हो सकती है। वहीं दूसरी तरफ, निजी वाहनों पर निर्भरता में अच्छी खासी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है और यह 28 फीसदी से बढ़कर 38 फीसदी हो जाएगी। 
‘लो कॉन्टैक्ट मोड’ की होगी वापसी
सीएसई के अध्ययन से निकले निष्कर्षों से यह भी पता चलता है कि यात्रा के लो कॉन्टैक्ट (कम संपर्क) मोड, जैसे पैदल चलना और साइकिल चलाना छोटी दूरी तय करने के लिए लोगों के बीच पसंदीदा विकल्प के रूप में उभरने सकते हैं। लॉकडाउन से पहले, 4 फीसदी यात्री पैदल चलते या साइकिल चलाते थे। आने वाले महीनों में यह आंकड़ा बढ़ेगा और इसके 12 फीसदी तक पहुंचने की उम्मीद है। 
स्वास्थ्य की चिंता
अध्ययकर्ताओं ने कहा कि यात्रा संबंधी इन प्राथमिकताओं में बदलाव लोगों की स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के चलते आएगा। 

इस तरह के निष्कर्ष और चिंताएं अब यातायात से जुड़े अधिकारियों को इस बात पर दोबारा सोचने पर मजबूर कर रही हैं कि भारत में सार्वजनिक परिवहन को किस तरह से फिर से शुरू किया जाए कि भीड़ कम हो, अगर ये फिर से शुरू होती हैं तो। 
‘सोशल डिस्टैंसिंग का पालन कितना कारगर’
एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक स्वतंत्र शोध संगठन डब्ल्यूआरआई इंडिया में शहरी परिवहन के निदेशक अमित भट्ट कहते हैं, “प्रति यात्री न्यूनतम 1 मीटर की सामाजिक दूरी को ध्यान में रखते हुए, दिल्ली मेट्रो सेवाओं में लगभग सात गुना और बस सेवाओं में पांच गुना तक बढ़ाना होगा।”

इसके साथ ही उन्होंने कहा, “लेकिन यह संभव नहीं है। यात्रियों और ऑन-बोर्ड कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए ऑन-बोर्ड सुरक्षा उपाय करने की आवश्यकता है। इसमें सार्वजनिक परिवहन सेवा के लिए उपयोग किए जाने वाले सभी स्थानों को सैनेटाइज करना और कर्मचारियों को सेवाओं की निरंतर कार्यप्रणाली सुनिश्चित करने के लिए जोखिम से बचाना शामिल हो सकता है।”  

सार

अगले छह महीनों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट (सार्वजनिक परिवहन) के इस्तेमाल में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है, जबकि इस दौरान निजी वाहनों का उपयोग बढ़ सकता है। सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट (सीएसई) ने एक अध्ययन के बाद यह विश्लेषण किया है। 

विस्तार

रिपोर्ट के मुताबिक इस अध्ययन में 400 से अधिक मध्यम और उच्च मध्यम वर्ग के यात्रियों के आने-जाने के पैटर्न और प्राथमिकताओं के आधार पर विश्लेषण किया गया। जिससे पता चलता है कि वायरस संक्रमण को फैलने के लिए रोकने के लिए 25 मार्च से लागू हुए लॉकडाउन से पहले, दिल्ली में 37 फीसदी यात्री मेट्रो के जरिए सफर करते थे, 28 फीसदी यात्रियों ने निजी वाहनों का उपयोग किया और 7 फीसदी यात्रियों ने सार्वजनिक बसों का इस्तेमाल किया। 

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