भारत की धीमी विकास दर को कोरोना ने और बदतर किया – Coronavirus lockdown worsened india slow growth rate gdp covid 19 diu

  • देश की विकास दर घटकर 3.1 प्रतिशत पर पहुंची
  • यह जीडीपी का 11 साल का सबसे निचला स्तर है

भारतीय अर्थव्यवस्था पर Covid-19 महामारी और लॉकडाउन का शुरुआती असर दिखना शुरू हो गया है. मौजूदा वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में, पिछले वर्ष की तुलना में देश की विकास दर घटकर 3.1 प्रतिशत रह गई है. यह 11 साल का सबसे निचला स्तर है. मार्च के अंतिम सात दिनों में कोरोना वायरस से निपटने के लिए देशव्यापी तालाबंदी कर दी गई थी और आर्थिक गतिविधियों को पूरी तरह से ठप कर दिया गया था.

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च तक तीन महीने के लिए भारत की जीडीपी का अनुमान पिछले वर्ष के 5.7 फीसदी की तुलना में 3.1 फीसदी है. वित्त वर्ष 2020 की पहली तिमाही से लेकर तीसरी तिमाही की भी जीडीपी वृद्धि दर को संशोधित किया गया है.

वार्षिक वृद्धि के हिसाब से देखा जाए तो वित्त वर्ष 2020 की जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 2017 (8.3 प्रतिशत) की लगभग आधी रही. तिमाही के हिसाब से देखें तो वित्त वर्ष 2019 की चौथी तिमाही में यह 5.7% फीसदी थी, उसके बाद इसमें गिरावट आती गई है. इसके पहले सरकार ने 2018-19 में 6.1 फीसदी की तुलना में, 2019-20 के लिए 5 फीसदी वृद्धि दर का अनुमान लगाया था.

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भारत की विकास दर पिछले दो वर्षों से धीमी थी, लेकिन कोरोना महामारी ने हालात बदतर कर दिए हैं. उपभोक्ता मांग और निजी निवेश में गिरावट आई है. वित्त वर्ष 2020 में सबसे महत्वपूर्ण गिरावट सकल स्थायी पूंजी निर्माण (ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन- जीएफसीएफ) में आई है. 2019 में 9.8 के मुकाबले यह -2.8 पर आ गया है.

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मंत्रालय ने कहा, “मार्च 2020 से वैश्विक कोरोना महामारी के चलते राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन उपायों के मद्देनजर; आर्थिक संस्थाओं का आंकड़ा प्रवाह प्रभावित हुआ है. चूंकि इनमें से कुछ इकाइयां फिर से परिचालन शुरू कर रही हैं और इस तथ्य के कारण कि सरकार द्वारा अपेक्षित वित्तीय रिटर्न पेश करने के लिए वैधानिक समय सीमा बढ़ा दी गई है, ये अनुमान उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित हैं.”

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विशेषज्ञों का कहना है कि प्रारंभिक लॉकडाउन के कारण निजी व्यय में गिरावट आई है. इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (इंड-रा) के मुख्य अर्थशास्त्री और सार्वजनिक वित्त प्रमुख, देवेंद्र कुमार पंत ने इंडिया टुडे से कहा, “लॉकडाउन और मजदूरों के पलायन के कारण निजी व्यय में गिरावट आई है. उपभोक्ता मांग कमजोर होने के कारण निवेश की मांग में गिरावट आई है और कॉरपोरेट बैलेंस शीट पर भी असर पड़ा है. वित्त वर्ष 2021 में फिर से सरकारी व्यय की विकास का इंजन साबित होगा. कमजोर कमोडिटी कीमतें और आयात मांग, वृद्धि दर को कुछ मदद कर सकती है.”

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इस महामारी का सबसे बड़ा असर उन आठ राज्यों में होगा, जो महामारी की सबसे ज्यादा मार झेल रहे हैं. ये आठ राज्य भारत की जीडीपी में 60 फीसदी और कर्मचारियों की संख्या में 58 फीसदी का योगदान देते हैं.

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हाल के एक अध्ययन में, एसबीआई की रिसर्च विंग ने अनुमान लगाया है कि भारतीय राज्यों में लॉकडाउन के कारण 30 लाख करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है. एसबीआई की गणना के मुताबिक, “प्रत्येक राज्य के लिए जीएसडीपी (सकल राज्य घरेलू उत्पाद) में मंडल-वार आकलन किया गया और सामने आया कि राज्यों में कोरोना महामारी के कारण कुल जीएसडीपी नुकसान 30.3 लाख करोड़ रुपये का है, जो कि कुल जीएसडीपी का 13.5 प्रतिशत है.

एसबीआई का कहना है कि सबसे ज्यादा नुकसान (लगभग 50%) रेड जोन में है, जहां भारत के लगभग सभी बड़े जिले स्थित हैं. ऑरेंज और रेड जोन में जितना नुकसान हो रहा है, वह कुल नुकसान का लगभग 90 फीसदी है. कुल नुकसान का 15.6 फीसदी महाराष्ट्र में, 9.4 फीसदी तमिलनाडु में और 8.6 फीसदी गुजरात में दर्ज किया गया है. ये तीनों भारत के वे राज्य हैं जहां कोरोना वायरस के कन्फर्म मामले सबसे ज्यादा दर्ज किए गए हैं.

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दुनिया के दूसरे सबसे अधिक आबादी वाले देश ने अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबंधों में ढील के साथ 31 मई तक लॉकडाउन बढ़ाया है. लेकिन देश भर में कोरोना वायरस के मामले बढ़ रहे हैं, जिससे कुछ और महीनों के लिए आर्थिक गतिविधियों में बाधा आ सकती है. पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद् प्रणब सेन ने हाल ही में कहा है कि “मुझे अगली दो तिमाही (2020-21) में 3 फीसदी से अधिक आर्थिक वृद्धि की उम्मीद नहीं है. इसलिए 2024-25 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करना बेहद मुश्किल है”.

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