मोदी के 10 चुनाव वॉरियर्स, जिन्होंने 2019 में दिलाई थी ऐतिहासिक जीत – Bjp narendra modi government completes 1 year 2019 loksabha election bjp winning strategy amit shah jp nadda

  • मोदी सरकार 2.0 के एक साल 30 मई को होंगे पूरे
  • 2019 के चुनाव में BJP को 2014 से बड़ी जीत मिली

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल का पहला साल 30 मई को पूरा कर रही है. 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अपने दम पर 303 सीटें जीतकर राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया था. एनडीए को 353 सीटें मिली थीं. लड़ाई नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लड़ी गई लेकिन पार्टी में कई ऐसे वॉरियर्स हैं जिन्होंने अपने प्रधान सेनापति के लिए चुनावी जंग में जी-जान लगा दी और उसका नतीजा सबसे सामने है.

1. अमित शाह

अमित शाह को देश में बीजेपी की विजय गाथा का सूत्रधार माना जाता है. शाह ने जुलाई 2014 में बीजेपी अध्यक्ष का पदभार संभाला और उनका कार्यकाल पार्टी का स्वर्णिम कार्यकाल कहा जाए तो गलत नहीं होगा. आमतौर पर सत्तारूढ़ पार्टी संगठन पर ज्यादा ध्यान नहीं देती लेकिन अमित शाह ने इस धारणा को बिल्कुल उलटकर रख दिया. अध्यक्ष बनते ही वे पार्टी के विस्तार के लिए देशभर में घूमे और बूथ स्तर पर संगठन खड़ा करने की मुहिम चलाई. इसी का नतीजा था कि एक के बाद एक राज्यों में पार्टी को फतह तो मिली ही, 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी पहले से ज्यादा 303 सीटें जीतने में सफल रही.

पश्चिम बंगाल, ओडिशा और दक्षिण भारत में बीजेपी का प्रदर्शन बेहतर रहा. बिहार और महाराष्ट्र में एनडीए के घटक दलों के साथ गठबंधन का उनका गणित हिट रहा. पूर्वोत्तर में भी उन्होंने ऐसे समीकरण बैठाए कि वहां भी भगवा लहरा गया. मोदी सरकार 2.0 में अमित शाह गृहमंत्री हैं और निर्विवाद रूप से नंबर दो ही हैसियत रखते हैं.

2. जेपी नड्डा

अमित शाह के उत्तराधिकारी के तौर पर जेपी नड्डा बीजेपी अध्यक्ष बने हैं. 2019 के चुनाव में नड्डा को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया था. नड्डा ने यहां ऐसी कुशल राजनीतिक गोटियां चलीं कि बड़ा खतरा बताया जा रहा सपा-बसपा गठबंधन नतीजे आते ही औंधे मुंह नजर आया. यूपी की कुल 80 सीटों में से बीजेपी को 62 और सहयोगी अपना दल को 2 सीटें मिलीं, सपा-बसपा 15 सीटों पर सिमट गई जबकि कांग्रेस सिर्फ सोनिया गांधी की रायबरेली सीट बचा पाई. अमेठी सीट पर खुद राहुल गांधी चुनाव हार गए.

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के रास्ते सियासत में कदम रखने वाले नड्डा मोदी-शाह के साथ-साथ संघ के भी पसंदीदा माने जाते हैं. नड्डा का उदय 2010 में ही शुरू हो गया था, जब तत्कालीन पार्टी प्रमुख नितिन गडकरी ने मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल से खटपट के बाद नड्डा को महासचिव के रूप में अपनी टीम में शामिल किया था. गडकरी के बाद वह राजनाथ सिंह की टीम में भी रहे. 2014 में मोदी ने उन्हें स्वास्थ्य मंत्री बनाया और 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद अमित शाह गृहमंत्री बने तो नड्डा बीजेपी अध्यक्ष चुने गए.

3.भूपेंद्र यादव

बीजेपी में भूपेंद्र यादव को कुशल चुनावी रणनीतिकार माना जाता है. अमित शाह का उनपर भरोसा है. लोकसभा चुनाव 2019 में अमित शाह की योजना को भूपेंद्र यादव ने जमीन पर उतारा. 2019 के लोकसभा चुनाव में बिहार में आरजेडी के सारे समीकरण भूपेंद्र यादव ने फेल कर दिए. कुल 40 में से बीजेपी-जेडीयू-एलजेपी गठबंधन 39 सीटें जीत ले गया. एक सीट कांग्रेस को मिली जबकि आरजेडी खाता भी नहीं खोल सकी.

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अमित शाह ने ही भूपेंद्र यादव को राष्ट्रीय महासचिव बनाया था. वह अब उन तमाम राज्यों के प्रभारी हैं जहां कि पार्टी को विशेष ध्यान देने की जरूरत है. यादव 2013 में राजस्थान चुनाव, 2014 में झारखंड, 2015 में बिहार, 2017 में गुजरात चुनाव के प्रभारी थे और फिलहाल महाराष्ट्र के प्रभारी हैं.

4.धर्मेंद्र प्रधान

2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की जीत के एक बड़े नायक के तौर पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी उभरे. मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री थे. उज्ज्वला योजना को सफल करना उनकी ही जिम्मेदारी थी. इस योजना के जरिए बीजेपी को ग्रामीण क्षेत्र में अपना आधार मजबूत करने में काफी मदद मिली. इसका असर लोकसभा के चुनाव में साफ नजर आया. ओडिशा में नवीन पटनायक के गढ़ में बीजेपी के पैर जमाने में प्रधान ने अहम भूमिका निभाई.

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ओडिशा में बीजेपी 21 में से 8 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रही. इसके पांच साल पहले 2014 में राज्य में बीजेपी को मात्र एक सीट मिली थी. मौजूदा मोदी सरकार में भी धर्मेंद्र प्रधान पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय और इस्पात मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.

5. कैलाश विजयवर्गीय

अमित शाह बीजेपी अध्यक्ष रहते हुए 2015 में कैलाश विजयवर्गीय को मध्य प्रदेश से दिल्ली संगठन में लाए थे. शाह ने कैलाश विजयवर्गीय को सबसे पहले हरियाणा में कांग्रेस का गढ़ ध्वस्त करने की जिम्मेदारी दी. हरियाणा में जीत के बाद अब उन्हें पश्चिम बंगाल में तृणमूल के गढ़ को जीतने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. कैलाश विजयवर्गीय ने 2019 के लोकसभा चुनाव में बंगाल की 42 सीटों में से 18 सीटें बीजेपी को जिताकर अपनी कुशलता साबित कर दी है. वे अब 2021 के विधानसभा चुनाव में कमल खिलाने की मुहिम में जुटे हुए हैं और पार्टी में राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं.

6. अनिल जैन

डॉ. अनिल जैन का सियासी ग्राफ अमित शाह के राष्ट्रीय टीम में आने के बाद बढ़ा है. राजनाथ सिंह के अध्यक्ष रहते हुए अनिल जैन पार्टी में सचिव थे लेकिन अमित शाह ने पार्टी की कमान लेते ही उन्हें महासचिव बना दिया. जैन के पास छत्तीसगढ़ और हरियाणा की जिम्मेदारी है. लोकसभा चुनाव में इन दोनों राज्यों में बीजेपी का बेहतर प्रदर्शन रहा है. हालांकि, विधानसभा चुनाव में इन दोनों राज्यों में पार्टी का ग्राफ कम हुआ है, लेकिन हरियाणा की सरकार बचाने में बीजेपी सफल रही और इसका श्रेय अनिल जैन को मिला.

7. योगी आदित्यनाथ

पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह के बाद बीजेपी में सबसे ज्यादा लोकप्रियता उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मिली है. योगी हिंदुत्व का बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं, इसी का नतीजा है कि देश में मोदी-शाह के बाद सबसे ज्यादा उनकी ही रैलियां होती हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव में योगी अपना यूपी का किला बचाने में कामयाब रहे जबकि सपा-बसपा एक साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे थे. 2017 के बाद से जितने भी राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं वहां योगी स्टार प्रचारक रहे और उन्होंने रैलियां करके चुनावी माहौल को बीजेपी के पक्ष में करने की कोशिश की.

8. ओम माथुर

ओम माथुर बीजेपी में पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाले बड़े रणनीतिकार माने जाते हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें झारखंड और गुजरात के चुनाव प्रभारी के रूप में बड़ी जिम्‍मेवारी मिली थी. झारखंड में पार्टी को 14 में से 12 सीटों पर और गुजरात की सभी 26 सीटों पर शानदार जीत मिली. 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मिले भारी बहुमत के पीछे माथुर की मेहनत और रणनीति थी. 2014 में महाराष्ट्र और 2013 में गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मिली जीत में भी माथुर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. फिलहाल वे बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं और झारखंड के प्रभारी हैं.

9-10. राम माधव-हेमंत बिस्वा शर्मा

पूर्वोत्तर के राज्यों में बीजेपी का कमल खिलाने में बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव और असम सरकार में मंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा की अहम भूमिका रही है. पूर्वोत्तर की 25 लोकसभा सीटों में से बीजेपी 14 सीटें जीतने में कामयाब रही थी. इसके अलावा करीब 8 सीटें बीजेपी के सहयोगी दलों को मिलीं. पूर्वोत्तर में असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और त्रिपुरा में बीजेपी की सरकारें हैं और नगालैंड, मेघालय और मिजोरम में उसके सहयोगी दलों की. राम माधव-हेमंत बिस्वा शर्मा की जोड़ी ने पूर्वोत्तर में बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए की तर्ज पर नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक एलायंस यानी नेडा बनाया, जो एक तरह से अब पूर्वोत्तर के राज्यों में सरकारें चला रहा है. इसके अलावा राम माधव जम्मू-कश्मीर का प्रभार भी संभाल रहे हैं.

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