MP से महाराष्ट्र पहुंचा टिड्डियों का दल, कृषि अधिकारियों का दावा- बहुत कम नुकसान हुआ – Locusts have caused minimal damage to crops in maharashtra claim officers of agriculture department

  • महाराष्ट्र में नारंगी और आम के पत्तों को खा रहीं टिड्डियां
  • कृषि अधिकारियों ने दावा किया कि 24 घंटे अलर्ट पर हैं

राजस्थान और मध्य प्रदेश में फसलों को नुकसान पहुंचाने के बाद अब टिड्डियों का दल महाराष्ट्र तक पहुंच चुका है. हालांकि कृषि विभाग के अधिकारियों का दावा है कि महाराष्ट्र में टिड्डियों की वजह से फसलों को कम से कम नुकसान हुआ है.

जानकारी के मुताबिक टिड्डियों के दल अब एमपी से महाराष्ट्र राज्य की सीमा के उत्तर-पश्चिम की ओर निकल गए हैं. ये उंगली की लंबाई के कीड़े 12 किलोमीटर की लंबाई में 3 किलोमीटर की चौड़ाई के फॉर्मेशन में उड़ने वाले छोटे सींग वाले टिड्डों की सेना के रूप में दिखाई देते हैं. रात के दौरान ये कीड़े लगभग 1 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में बस जाते हैं और घास के मैदानों में दिखाई देते हैं.

महाराष्ट्र के तीन जिलों के किसानों ने बताया है कि उनकी नारंगी फलों की फसल को बहुत नुकसान हुआ है और अब सरकार को किसानों की आर्थिक मदद करनी चाहिए. वहीं आज तक से बात करते हुए टिड्डियों के हमले से निपटने वाले कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों के नुकसान के दावे और जमीनी हकीकत के बारे में स्पष्ट किया.

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अमरावती में कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक सुभाष नागरे ने बताया कि एमपी सीमा से अमरावती जिले में उंगली की लंबाई वाले टिड्डियों ने प्रवेश किया था. टिड्डियों के हमले की वजह से फसल को हुए नुकसान के बारे में नागरे ने कहा कि अब इस क्षेत्र में चावल के अलावा कोई ऐसी फसल नहीं है, जिसकी खेती सतपुड़ा के पहाड़ी इलाकों में की जाती है.

नागर ने आगे कहा कि सौभाग्य से रबी की फसलों की कटाई बहुत पहले ही हो गई थी, इसलिए टिड्डियों के झुंड के लिए कुछ नहीं बचा था. नारंगी के फल फिलहाल अभी कच्चे ही हैं. इन टिड्डियों ने अमरावती के मोर्शी तहसील में लगभग 50 हेक्टेयर फसलों को पार कर लिया होगा. टिड्डी दलों के नागपुर के कटोल क्षेत्र और फिर भंडारा की ओर जाने से पहले यहां के नारंगी फलों के पेड़ों के 10% पत्तों को खाया जा सकता है.

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कटोल और भंडारा जिले में स्थानीय ग्रामीणों के साथ कृषि विभाग की टीमें कैमिकल्स के साथ तैयार हैं जहां ये कीड़े दिखाई दिए थे. कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक रवींद्र भोसले ने भी अमरावती के जेडीए द्वारा कही बात ही दोहराई. उन्होंने कहा कि हालांकि इन कीड़ों द्वारा कवर किए गए बड़े क्षेत्र के कारण किसानों को डर लगता है, लेकिन फिर भी इन कीटों ने 50 हेक्टेयर की नारंगी फसल का केवल 10% को ही नुकसान पहुंचाया है क्योंकि अन्य फसलों की कटाई पहले ही हो चुकी है.

भोसले ने आगे बताया कि ये कीड़े केवल उस क्षेत्र में रुकते हैं, जहां वे पेड़-पौधों को खाने लायक पाते हैं. चूंकि अब इधर कोई खड़ी फसलें नहीं हैं, इस वजह से कीड़े नारंगी या आम के पेड़ों के ताजे पत्तों को खा रहे हैं, और इस तरह से किसानों का काफी बचाव हो गया है.

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लेकिन फिर भी टीमें दमकल की गाड़ियों में पानी और कीटनाशकों का मिश्रण लिए 24 घंटे अलर्ट पर रह रही हैं. इस प्रकार कीटनाशक के छिड़काव से टिड्डियों की उड़ने वाली सेना का लगभग 70% भाग नष्ट हो गया है. शेष टिड्डियों के झुंड को हवा की दिशा में गोंदिया की ओर उड़ते हुए देखा गया है.

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