लद्दाख में सीमा पर तनाव, क्या बातचीत से बनेगी बात? – India china border standoff chinese envoy india ladakh standoff china border moves

  • लद्दाख में एलएसी पर हलचल तेज
  • चीनी सेना के बड़े मूवमेंट के संकेत

लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) के आसपास सेना की हलचल बढ़ गई है. करीब 20 दिन पहले चीनी हेलिकॉप्टर्स भारतीय वायु सीमा के करीब आ गए थे, लेकिन भारत के फाइटर्स विमानों ने लेह एयर बेस से उड़ान भरकर उन्हें खदेड़ दिया था. हालांकि सेटेलाइट तस्वीरों से चीन की हिमाकत की पोल खुल चुकी है. ऐसे में चीन का इरादा क्या है, ये अभी तक साफ नहीं हो पाया है.

ताजा सैटेलाइट तस्वीरों से अक्साई चिन क्षेत्र में सड़क के किनारे चीनी सेना के बड़े मूवमेंट के संकेत मिलते हैं. अक्साई चिन लद्दाख का वही हिस्सा है जिस पर चीन ने 1962 युद्ध के बाद से कब्जा कर रखा है. यूरोपियन स्पेस एजेंसी की ताजा तस्वीरों से इस महीने के तीसरे हफ्ते में अक्साई चिन क्षेत्र में मूवमेंट के संकेत मिलते हैं. इन तस्वीरों के विश्लेषण से पता चलता है कि मूव करते ढांचे 30-50 मीटर ऊंचे हो सकते हैं. तस्वीरें जमीन पर हुए और देखे जा सकने वाले बदलावों को दर्शाती हैं जो कि संभवत: बड़े पैमाने पर मूवमेंट की वजह से हुए.

पूर्व आर्मी चीफ बिक्रम सिंह ने कहा कि चीन बॉर्डर एरिया पर ऐसी हरकत कई बार कर चुका है और भारतीय सेना ने हर बार उसे माकूल जवाब दिया है. सीमा संधि का मुद्दा भी हल हो जाएगा, अगर इस पर आमने-सामने बातचीत होगी. ये डिप्लोमेट्स पर तय होगा.

गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत से ही लद्दाख में चीनी सैनिक और भारतीय सैनिक आमने-सामने हैं, चीन की ओर से लगातार सैनिकों की संख्या बढ़ाने और बेस बनाने की खबरें आ रही हैं. 6-7 मई को चीन और भारत के सैनिकों की सीमा की निगरानी के दौरान पेंग्योंग लेक इलाके में झड़प भी हुई थी. इसके बाद से पूर्वी लद्दाख की सीमा पर लगातार तनाव बना हुआ है.

चीन ने किस तरह लद्दाख के पास धोखा देते हुए जुटाए सैनिक

पीएम मोदी ने मंगलवार को लद्दाख मामले पर पूरी रिपोर्ट ली, इसके अलावा तीनों सेना के प्रमुखों से विकल्प सुझाने के लिए कहा गया. इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल भी मौजूद रहे, इस दौरान सेना प्रमुखों, सीडीएस से इस मसले पर ब्लू प्रिंट मांगा गया है. पीएम मोदी की बैठक से पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस मसले पर बैठक की थी और ये फैसला हुआ था कि भारत लद्दाख बॉर्डर पर अपनी सड़क का निर्माण नहीं रोकेगा.

वहीं भारत में चीन के राजदूत सुन वीडोंग ने कहा कि दोनों देश कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं. हमारे पास संबंधों को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कार्य है. हमारे युवाओं को चीन और भारत के बीच संबंध का एहसास होना चाहिए, दो देश एक-दूसरे के लिए अवसर हैं और कोई खतरा नहीं है.

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने झाओ लिजिआन ने कहा कि सीमा से संबंधित मुद्दों पर चीन का रुख स्पष्ट और सुसंगत है. हम दोनों देशों के बीच हुए समझौते का सख्ती से पालन करते रहे हैं.

हालांकि इस तनाव को खत्म करने के लिए भारत और चीन के अधिकारियों के बीच रविवार को मीटिंग हुई. यह बातचीत स्थानीय कमांडर और हाई कमांडर लेवल पर हुई है. मीटिंग में दोनों पक्षों ने अपनी अपनी चिंताएं जाहिर की. अधिकारियों का मानना है कि लगातार चल रही बातचीत का मतलब है कि तनाव जल्दी कम होगा.

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डोकलाम विवाद

डोकलाम विवाद सभी को याद ही होगा, साल 2017 में करीब 73 दिन तक भारतीय सेना और चीनी सेना के बीच तनातनी बनी हुई थी. लगभग 300 भारतीय सैनिकों ने डटकर मुकाबला करते हुए चीन के सड़क निर्माण को रोक दिया था. इस विवाद के चलते दोनों पक्षों के बीच गतिरोध पैदा हो गया और दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने आ गई थीं. उसके बाद चीन के वुहान में साल 2018 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अनौपचारिक शिखर वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच संबंध पुन: पटरी पर लौटे.

लगातार युद्ध की धमकी दे रहे चीन को इस मुद्दे पर पीछे ढकेलना भारत की कूटनीति की एक बड़ी जीत मानी गई. इस पूरे मामले को सुलझाने में सबसे अहम रोल रहा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार प्रमुख अजित डोभाल का.

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, अजित डोभाल ने 27 जुलाई को बीजिंग में चीन के स्टेट काउंसलर यांग जिएची से इस मुद्दे पर बात की थी. खबर की मानें, तो दोनों के बीच काफी सख्त लहजे में बातचीत हुई थी. यांग ने डोकलाम पर डोभाल से सीधा सवाल किया था कि क्या ये आपकी जगह है?

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इसका जवाब भी डोभाल ने अपने अंदाज में दिया कि क्या हर विवादित क्षेत्र चीन का हो जाता है? डोभाल ने सीधे तौर पर कहा कि यह इलाका भूटान का है और हिमालयी सुरक्षा नीति के कारण भारत भूटान की सैन्य मदद कर रहा है. चीन ने इस दौरान उसकी और भूटान की बातचीत का हवाला दिया, लेकिन डोभाल ने कहा कि जब तक विवाद खत्म नहीं होता है तो दोनों सेनाओं को विवादित जगह से पीछे हटना चाहिए.

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