मैच के दौरान इस PAK क्रिकेटर को लगा था ऐसा सदमा कि दोबारा टेस्ट नहीं खेला – pakistan cricketer saeed anwar tragic story tspo

  • पाकिस्तान ने अपनी सबसे बड़ी जीत का जश्न नहीं मनाया
  • सईद अनवर की साढ़े तीन साल की बेटी की हो गई थी मौत

पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर सईद अनवर का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर 13 साल (1990-2003) का रहा. 2001 का मुल्तान टेस्ट इस सलामी बल्लेबाज के लिए आखिरी टेस्ट साबित हुआ. इस टेस्ट में शतक जमाने के बावजूद उन्होंने दोबारा टेस्ट क्रिकेट नहीं खेला और दो साल बाद अंतराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया.

दरअसल, 31अगस्त 2001 को पाकिस्तान ने एशियन टेस्ट चैम्पियनशिप के दौरान मुल्तान टेस्ट के तीसरे ही दिन बांग्लादेश के खिलाफ पारी और 264 रनों से बड़ी जीत हासिल की. उस वक्त टेस्ट में वह उसकी सबसे बड़ी जीत थी (हालांकि एक साल बाद ही उसने न्यूजीलैंड को लाहौर टेस्ट में पारी और 324 रनों से हराया था).लेकिन पाकिस्तान अपनी उस विशाल जीत का जश्न नहीं मना पाया.

उस मुल्तान टेस्ट में 546/3 रनों के स्कोर में पाकिस्तान के पांच बल्लेबाजों ने शतक जड़े थे (जो ऑस्ट्रेलिया के साथ संयुक्त रूप से टेस्ट की एक पारी में सर्वाधिक शतकों का रिकॉर्ड है). इनमें सईद अनवर भी शामिल रहे. उन्होंने 101 रन बनाए. जो उनका 11वां और आखिरी शतक साबित हुआ.

दरअसल, सईद अनवर के मुल्तान टेस्ट के पहले दिन (29 अगस्त को) शतक जमाने के दो दिन बाद ही उनकी साढ़े तीन साल की बेटी बिस्माह की लंबी बीमारी के बाद मौत हो गई. वे लाहौर लौट गए. इसके बाद फिर कभी टेस्ट मैच नहीं खेले.

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बेटी की असामयिक मौत के बाद अनवर का झुकाव धर्म की ओर हो गया है और वह इस्लाम के प्रचार- प्रसार में लग गए. उन्होंने अपनी दाढ़ी भी बढ़ा ली थी. दूसरी तरफ, सईद अनवर वनडे टीम में अंदर-बाहर होते रहे. 2003 वर्ल्ड कप में उन्होंने भारत के खिलाफ जुझारू शतक जमाया, लेकिन पाकिस्तान वह मैच हार गया था. अनवर ने वह शतक अपनी दिवंगत बेटी को समर्पित किया.

आखिरकार सईद अनवर ने 15 अगस्त 2003 को इंटरनेशनल और फर्स्ट क्लास क्रिकेट को अलविदा कह दिया. उन्होंने पाकिस्तान के लिए 55 टेस्ट में 45.52 की औसत से 4052 (11 शतक, 25 अर्धशतक) रन बनाए थे, जबकि 247 वनडे में उन्होंने 39.21 की औसत से 8824 रन बनाए. उन्होंने इस दौरान 20 शतक और 43 अर्धशतक जमाए.

पाकिस्तान के इस सलामी बल्लेबाज ने 1997 में भारत के खिलाफ चेन्नई में 194 रन बनाए, जो तब वनडे की सबसे बड़ी पारी रही. मजे की बात है कि कप्तान सचिन तेंदुलकर ने खुद गेंदबाजी करते हुए सईद अनवर को सौरव गांगुली के हाथों लपकवाया था और उन्हें दोहरा शतक जमाने से रोका था.

वनडे इतिहास में 12 साल तक सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर का रिकॉर्ड सईद अनवर के नाम रहा. 2009 में जिंब्बाब्वे के चार्ल्स कोवेंट्री ने नाबाद 194 रनों की पारी खेलकर इस जादुई आंकड़े की बराबरी की थी. लेकिन इसके तीन साल बाद ही सचिन तेंदुलकर ने नाबाद 200 रनों की ऐतिहासिक पारी खेलकर रिकॉर्डबुक में नाम दर्ज करा लिया था.

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