‘द ग्रेट वैक्सीन हंट’ के साथ एंटी-वैक्सीन मुहिम ने भी पकड़ा ज़ोर – Experimental covid shots inject anti vaccine sentiments


  • दुनिया में वैक्सीन विरोधियों की बढ़ रही ताकत
  • जॉन एफ कैनेडी के भतीजे इस मुहीम में आगे

Covid-19 शॉट या वैक्सीन (टीका) की तलाश के लिए दुनिया भर में दिन-रात कोशिशें अभूतपूर्व रफ्तार पर हैं. वहीं वैक्सीन विरोधी भावनाएं भी जोर पकड़ रही हैं. इनके पीछे वो थ्योरी हैं जिनके मुताबिक फॉस्ट ट्रैक कार्यक्रमों के पीछे मुनाफा कमाने की भावना है, साथ ही इसमें स्वास्थ्य से जुड़े जोखिम हैं और आखिरकार ये सब जबरन इम्युनाइजेशन (प्रतिरक्षण) में तब्दील होगा.

अमेरिका में पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी के भतीजे रॉबर्ट एफ कैनेडी जूनियर कट्टर एंटी- वैक्सर (वैक्सीन विरोधी) हैं. वो RFK जूनियर के नाम से मशहूर हैं. RFK जूनियर माइक्रोसाफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स के भी धुर आलोचक हैं. बता दें कि बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने Covid-19 रिस्पॉन्स के लिए $ 250 मिलियन यानि 25 करोड़ डॉलर देने का ऐलान किया है. लेकिन RFK जूनियर जैसे आलोचकों का आरोप है कि माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक वायरस वैक्सीन से मुनाफा कमाने के लिए खड़े हैं.

RFK जूनियर ने इस महीने एक यू-ट्यूब प्रसारण में कहा, “यह (वैक्सीन प्रोग्राम) सिर्फ फार्मास्युटिकल उद्योग के लिए एक बहुत बड़ा कल्याणकारी कार्यक्रम है और बिल गेट्स इसके निवेशकों में से एक है. यह वैक्सीन संभवतः अहम है क्योंकि किसी के पास भी जनवरी तक इसे तैयार करने के लिए अकेला मौका है. ये युद्ध स्तर की यानी बहुत ही तेज समय-सीमा है. आप नियमित वैक्सीन के साथ ऐसा नहीं कर सकते.”

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वैक्सीन विरोधी एक्टिविस्ट ने अमेरिका के टॉप डिजीज एक्सपर्ट डॉ एंथनी फौसी को भी निशाने पर लिया है. RFK जूनियर की ओर से बिल गेट्स और एंथनी फौसी के खिलाफ जो आरोप लगाए गए हैं, उन्हें वैज्ञानिक समुदाय, फार्मा इंडस्ट्री, राजनीतिक नेतृत्व ने बेबुनियाद साजिश थ्योरी बताते हुए खारिज कर दिया है.

हालांकि Covid वैक्सीन कार्यक्रमों के विरोध को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर काफी जगह मिल रही है.

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वैक्सीन विरोधियों की बढ़ रही है ताकत

जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की एक स्टडी के मुताबिक वैक्सीन्स का विरोध करने वाले ग्रुप आकार में छोटे हैं, लेकिन उनकी ऑनलाइन-कम्युनिकेशन रणनीति चिंताजनक स्तर पर कारगर और दूर तक असर डालने वाली है.

नेचर जर्नल में इसी महीने प्रकाशित स्टडी में शोधकर्ताओं ने अपने निष्कर्षों में कहा है कि वैक्सीनेशन विरोधी पेजों पर कम फॉलोअर्स होते हुए भी वो वैक्सीनेशन का समर्थन करने वालों की तुलना में अधिक होते हैं. साथ ही ये अन्य फेसबुक पेजों से चर्चा के लिए जुड़े होते हैं. जैसे कि- स्कूलों की पेरेंट एसोसिएशन्स- जिनका वैक्सीनेशन को लेकर कोई रुख तय नहीं है.

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स्टडी में फेसबुक पेजों को क्लस्टर के रूप में इस्तेमाल किया गया और उनमें से 1,300 से अधिक को खंगाला गया. इन पेजों को 85 मिलियन (8.5 करोड़) लोगों की ओर से फॉलो किया जाता है.

शोधकर्ताओं ने नजरिए और ज्ञान के स्तर को जानने के लिए इन पेजों को खंगाला. इसके लिए स्वचालित प्रक्रियाओं और विषयवार विश्लेषण के मिक्स का सहारा लिया गया. इसमें पेजों पर दृष्टिकोण, जन चर्चा और पोस्टिंग एक्टिविटी से संबंधित फीड्स का सर्वे किया गया.

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ओक्लाहोमा स्टेट यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के सहायक प्रोफेसर मैट मोट्टा और मिनेसोटा यूनिवर्सिटी में डॉक्टरेट उम्मीदवार क्रिस्टीन लुनज ट्रूजिलो की ओर से अप्रैल में किए गए एक और सर्वे के मुताबिक अमेरिका में हर पांच में से एक शख्स Covid शॉट लेने को तैयार नहीं दिखा.

इस स्टडी में 493 अमेरिकी वयस्कों को शामिल किया गया. ये अलग अलग डेमोग्रेफिकली प्रतिनिधित्व कर रहे थे. इनसे पूछा गया कि क्या वे वैक्सीन उपलब्ध होने के बाद Covid-19 के खिलाफ इम्युनाइजेशन (प्रतिरक्षण) के लिए तैयार होंगे?

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शोधकर्ताओं ने कहा, “हमने पाया कि अमेरिकियों का 1/5 हिस्सा, और जो लोग वैक्सीन सुरक्षा को लेकर संशयवादी विचार रखते हैं उनमें से आधे से ज्यादा, वैक्सीनेशन को आगे बढ़ाने के लिए अनिच्छुक हो सकते हैं.”

शोधकर्ता आगे कहते हैं, “हालांकि अधिकतर अमेरिकी वैक्सीनेशन की योजना बनाते हैं, लेकिन उस पर अमल ना करने की दर अधिक रह सकती है जो कि सामूहिक इम्युनिटी को खतरा पेश करने के लिए काफी होगी.”

द ग्रेट वैक्सीन हंट

लेकिन वैक्सीन की तलाश में लगे लोग काम पर हैं. अब तक, वैक्सीन के कुछ 124 संभावित कैंडीडेट्स विभिन्न देशों में विकास के विभिन्न चरणों में हैं. WHO ने उनमें से लगभग दस को ट्रायल में सबसे आगे बताया. अपनी ओर से WHO ने सुरक्षा को लेकर जताई जा रही आशंकाओं को दूर करने की जरूरत जताई है.

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कोरोनावायरस महामारी पर WHO की टेक्नीकल लीड डॉ मारिया वान केरहोव ने इस संबंध में कहा “मैं यह उल्लेख करना चाहती हूं कि कुछ वैक्सीन कैंडीडेट्स के लिए हमारे पास थोड़ा हेड-स्टार्ट इस मायने में था कि इन कैंडीडेट्स को विकसित करने का काम Covid-19 के उभरने से पहले ही शुरू हो गया था और उन्होंने SARS और MERS के साथ शुरुआत की थी, इसलिए उनमें से कुछ थोड़ा आगे हैं.”

20 मई को डॉ केरहोव ने कहा, “लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि जैसे ये वैक्सीन्स विकसित किए जा रहे हैं, हम सुनिश्चित करें कि वे फिट हों और साथ ही सुरक्षित और प्रभावी होने के लिए सभी मानदंडों को पूरा करते हों. इसके लिए कोई शॉर्टकट नहीं है, इसलिए जब हम कहते हैं कि विकास में तेजी आए, तो हमारा मतलब है कि वैक्सीन की असल में तात्कालिक जरूरत है, इसलिए विकास में तेजी आए. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम किसी भी कदम को छोड़ देंगे. या किसी को भी कोई कदम छोड़ने की इजाजत दी जाए. ऐसा सुरक्षित और कारगर वैक्सीन सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है.”

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कहना आसान, करना मुश्किल

लेकिन पॉलिसीमेकर्स ने अहसास करना शुरू किया है कि थोड़ी समय सीमा में एक सुरक्षित वैक्सीन तैयार करना कहना आसान है लेकिन करना मुश्किल है.

मिसाल के लिए, HIV को 1983 में पहली बार पहचाना गया. लेकिन संक्रमण को रोकने के लिए चार दशक बाद अब भी वैक्सीन आने का इंतजार किया जा रहा है.

“Covid-19 के साथ रहना सीखना”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, ब्रिटेन के प्रधान मंत्री बोरिस जॉनसन से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विशेषज्ञ तक ये जोर देने लगे हैं कि इनसानों को कोरोनावायरस के साथ रहना जीना सीखना होगा. WHO के इमरजेंसीस डायरेक्टर डॉ माइक रयान ने 13 मई को एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “यह बात कहनी जरूरी है कि ये वायरस हमारे समुदायों में एक और स्थायी वायरस बन सकता है, और यह वायरस शायद कभी दूर नहीं जाए.” उन्होंने आगे कहा, “HIV दूर नहीं हुआ है लेकिन हम वायरस के साथ रहना सीख गए हैं.”

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ड्रगमेकर्स, आंशिक डेटा, मार्केट

जैसा कि Covid वैक्सीन की खोज आशा और संदेह के बीच फंसी है, इसके बारे में कोई भी खबर ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट्स में उतार चढ़ाव का कारण बन जाती है. कई दवा कंपनियों की ओर से की गई रिसर्च के शुरुआती आंकड़ों ने उनके शेयर्स को ऊपर उठा दिया जबकि बाकी दुनिया लॉकडाउन्स की वजह से गहरी मंदी में डूबी हुई है.

जब व्हाइट हाउस के स्वास्थ्य सलाहकार डॉ फौसी ने 29 अप्रैल को Covid-19 के लिए “क्लियर-कट महत्वपूर्ण” के तौर पर प्रयोगात्मक दवा रेमडेसिविर के नतीजों की सराहना की तो वॉल स्ट्रीट ने खुशी जताई. इस ड्रग को बनाने वाले कंपनी गिलिएड साइंसेज के शेयरों में उसी दिन तेजी आ गई. हालांकि दवा के नतीजों का PEER-REVIEW (समकक्ष की ओर से समीक्षा) नहीं हुआ था.

एक हफ्ते पहले, मार्केट और उसी अमेरिकी कंपनी के शेयर नीचे आ गए जब WHO ने एक और स्टडी के अंशों को संक्षिप्त में प्रकाशित किया था. इनमें कहा गया था कि चीन में रेमडेसिविर के ट्रायल कारगर नहीं रहे.

WHO ने उस शोध को अपनी वेबसाइट से हटा दिया. इसके Peer-Reviewed निष्कर्षों को बाद में ‘द लैंसेट’ में प्रकाशित किया गया. था, इसमें साथ में कैवेट दिया गया कि ट्रायल अधूरा था क्योंकि पर्याप्त मरीज नहीं थे. जब अमेरिकी बायोटेक कंपनी ‘मॉडर्ना’ ने 18 मार्च को अपनी कोरोनावायरस वैक्सीन के एक छोटे ट्रायल से आशाजनक परिणाम की घोषणा की, तो इस कंपनी के शेयर के दाम 30% तक उछल गए.

फैलेंक्स इन्वेस्टमेंट पार्टनर्स के प्रबंध निदेशक डेविड मैरिस दवा उद्योग को लंबे समय से कवर करने वाले एक विश्लेषक हैं. वो कहते हैं, “ये सभी अधूरी जानकारी के आधार पर वाइल्ड स्विंग्स हैं.” न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक लेख में मैरिस के हवाले से कहा, “यह एक क्रेजी और अटकलों से भरा माहौल है क्योकि इस महामारी ने लोगों को ये मानने को मजबूर कर दिया है कि चमत्कारिक समय सीमा में चमत्कारिक इलाज निकल आएगा.” इस लेख को नाम दिया गया- ‘’कैसे अपबीट वैक्सीन खबर से स्टॉक चढ़े और शोरशराबा हुआ?” दवा निर्माता शुरुआती नतीजों को जारी करने के पीछे कोई निहित स्वार्थ होने के आरोपों से इनकार करते हैं.

भू-राजनैतिक विरोधी धाराओं का पेंच

WHO के मुताबिक ह्यूमन ट्रायल स्टेज में दस वैक्सीन कैंडीडेट्स में से पांच अकेले चीन से हैं और शेष अन्य देशों से हैं, जिनमें अमेरिका और ब्रिटेन भी शामिल हैं. आमतौर पर सुरक्षित और प्रभावी वैक्सीन विकसित करने में वर्षों या एक दशक या उससे अधिक समय लगता है. इस वक्त को परियोजना में शामिल लगभग सभी दवा निर्माता महामारी की वजह से इसे कम करने की कोशिश कर रहे हैं.

लेकिन ऐसी भी आशंकाएं हैं कि ये कार्यक्रम भूराजनीति, ट्रेड वॉर और राष्ट्रवादी भावनाओं की परस्पर विरोधी धाराओं के बीच फंस सकते हैं.

इस महीने की शुरुआत में हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के डीन जॉर्ज क्यू डेली ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया, “ग्लोबल टर्म्स के बजाय देश प्रति देश की दृष्टि से सोचना अक्खड़ और दु:साहसी होगा.” उन्होंने कहा, “इस तरह के रुख से वैक्सीन की शुरुआती खुराकों को कम जोखिम वाले लोगों पर बड़ी संख्या में उजाड़ देना होगा. बजाए इसके कि उसका इस्तेमाल वैश्विक स्तर पर अधिक जोखिम वाले लोगों पर किया जाए जिससे कि संक्रमण को फैलने से रोका जाए.”





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