दिल्ली: घरवाले करा रहे थे बाल विवाह, दिल्ली महिला आयोग ने रोका – Delhi commission for women halts child marriage police parental counseling

  • पुलिस ने शादी रुकवाने में की मदद
  • महिला आयोग को मिली थी शिकायत

दिल्ली महिला आयोग ने लॉकडाउन के बीच होने जा रही नाबालिग किशोर-किशोरी की शादी रुकवा दी. महिला आयोग से शिकायत लड़की की चाची ने ही की थी. दिल्ली महिला आयोग के हेल्प लाइन नंबर 181 पर लड़की की चाची ने कॉल कर बताया कि उसकी 16 वर्ष की भतीजी का उसके पति और सास द्वारा विवाह करवाया जा रहा है.

महिला ने बताया कि लड़की के माता पिता नहीं हैं और उसकी शादी एक 16 साल के लड़के से कराई जा रही है. शिकायत मिलने पर दिल्ली महिला आयोग की टीम पुलिस के साथ मौके पर पहुंची. मौके पर पहुंची टीम को नजर आया कि लड़की के घर पर एक बड़े बर्तन में घुली हल्दी और मेहंदी रखी हुई थी.

जब लड़की की दादी से शादी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि अभी बच्चों की शादी नहीं सगाई कराई जा रही है. उन्होंने बताया कि 6 महीने पहले उनकी पोती इसी लड़के के साथ घर से भाग गई थी. दोनों की जिद है उन्हें शादी करनी है. लड़की के दादी ने यह भी बताया कि उनकी पोती आत्महत्या करने की धमकी भी देती है, इसलिए घरवालों ने सगाई करवाने का फैसला किया.

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टीम की ओर से दोनों बच्चों और परिवार वालों को पुलिस स्टेशन ले जाया गया. सभी के बयान दर्ज करवाने के बाद मामले में रिपोर्ट दर्ज करवाई गई. पूरे मामले की सूचना चाइल्ड वेलफेयर कमेटी और स्थानीय एसडीएम को दी गई. दिल्ली महिला आयोग की टीम ने लड़की की कॉउंसलिंग की और उसे कानून के बारे में बताया.

बाल विवाह कानून जुर्म

लड़की के परिवारवालों को भी सख्ती से समझाया गया कि बालविवाह कानूनन जुर्म है. बच्चों को समझाए जाने के बाद उन्होंने यह माना कि बालिग होने तक वे गैरकानूनी ढंग से शादी नहीं करेंगे. लड़की के परिवार वालों से भी पुलिस की मौजूदगी में लिखित में लिया गया कि वे इस तरह की गैरकानूनी गतिविधि को दोबारा अंजाम नहीं देंगे. उन्होंने लड़की को मनोवैज्ञानिक परामर्श दिलाने का भी निर्देश दिया.

‘बच्चों को सही गलत का फर्क समझाना जरूरी’

दिल्ली महिला आयोग अध्यक्ष स्वाति मालिवाल ने कहा, ‘इस केस की जानकारी मिलते ही हमारी टीम पुलिस के साथ दिए गए पते पे पहुंची और बाल विवाह को रुकवाया. अब तक दिल्ली महिला आयोग ऐसे हजारों केस पर काम कर चुका है. बच्चों को सही गलत का फर्क समझाना बहुत जरूरी है. बच्चों को सही मनोवैज्ञानिक परामर्श की भी जरूरत है. ऐसे मां-बाप जो अपने बच्चों की कम उम्र में शादी कराते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई भी होनी चाहिए.’

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