क्या Covid-19 को लेकर गुजरात का प्रदर्शन सुधरने का राज़ कम टेस्टिंग में छुपा है? – Does gujarats improved show against covid 19 hide a testing deficit

  • 26 मई तक गुजरात की टेस्टिंग 1,000 लोगों पर 2.79
  • गुजरात में 27 मई तक 915 मौतें दर्ज की गई हैं

पहली नजर में लगता है कि गुजरात में Covid-19 महामारी कुछ हद तक काबू में है. तमिलनाडु ने कोरोनावायरस केसों की संख्या में गुजरात को पीछे छोड़ दिया है. गुजरात में नए केस धीमी गति से बढ़ रहे हैं और ये राज्य हर दिन अपने लोगों की टेस्टिंग कर रहा है. लेकिन इन सुर्खियों वाले संकेतकों से हटकर राज्य के लिए कुछ चिंता वाली बातें भी हैं.

गुजरात में 27 मई तक 915 मौतें दर्ज की गईं. महाराष्ट्र के बाद देश में किसी भी राज्य के लिए ये मौतों का दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा था. गुजरात में महाराष्ट्र की तुलना में आबादी के अनुपात में कम मौतें हुई हैं, लेकिन केसों के बोझ के अनुपात में मृत्यु दर कहीं ऊंची है. गुजरात में ऐसे केसों की हिस्सेदारी जो मौत में तब्दील हुए 6 प्रतिशत से अधिक है. इस मामले में सिर्फ़ पश्चिम बंगाल ही गुजरात से आगे है जहां ये हिस्सेदारी 7 प्रतिशत है.

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महाराष्ट्र में अब गुजरात की तुलना में तीन गुना अधिक केस हैं. गुजरात में 27 मई तक 14,821 केस रिपोर्ट हुए हैं. इस समय, ऐसा लगना चाहिए कि गुजरात में स्थिति तेजी से सुधरेंगी. क्योंकि यहां केस धीमी रफ्तार से दोगुने हो रहे हैं. मिसाल के लिए महाराष्ट्र से तुलना में आधी दर पर गुजरात में केस दोगुने हो रहे हैं.

बीते सात दिनों में गुजरात में औसतन 24 दिनों में केस दोगुने हो रहे हैं. इसका अर्थ है कि गुजरात के मौजूदा दर पर 30,000 केस तक पहुंचने में लगभग एक महीना लगेगा.

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हालांकि गुजरात के प्रदर्शन को लेकर दिक्कत टेस्टिंग में है. राज्य सरकार का तर्क है कि हर दिन किए जाने वाले टेस्ट की संख्या बढ़ रही है. लेकिन यह अहम तथ्यों को दरकिनार करता है. पहला, राज्य में महाराष्ट्र या तमिलनाडु की तुलना में प्रति 1,000 लोगों पर टेस्ट का अनुपात कम है. गुजरात की टेस्टिंग दर बहुत धीमी गति से बढ़ रही है. 26 मई तक गुजरात की टेस्टिंग हर 1,000 लोगों पर 2.79 थी. महाराष्ट्र के लिए ये आंकडा 3.2 और तमिलनाडु के लिए 5.7 है.

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महामारी की इस स्टेज पर भी गुजरात हर दिन कम लोगों की टेस्टिंग कर रहा है. गुजरात देश के कुछ राज्यों में से एक है जो हर दिन लोगों के टेस्ट की संख्या कम कर रहा है. टेस्टिंग को दबाने से राज्य अपने लिए इस आलोचना को आमंत्रित कर रहा है कि हर दिन नए केसों की कम संख्या टेस्टिंग घटाने की वजह से है.

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गुजरात के लिए ये खास तौर पर चिंता का विषय है क्योंकि इसकी सेम्पल पॉजिटिविटी दर ऊंची है. तमिलनाडु एक पॉजिटिव केस को ढूंढने के लिए 24 टेस्ट कर रहा है. इसके मायने हैं कि ये राज्य नए केस ढूंढने के लिए व्यापक जाल बिछा रहा है, हालांकि संक्रमण फैलते ही यह संख्या गिर रही है.

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गुजरात और महाराष्ट्र एक केस को ढूंढने के लिए क्रमश: सिर्फ़ 13 और 7 टेस्ट कर रहे हैं. और टेस्टिंग की ये संख्या लगातार नीचे आ रही है. ऐसे में ये सवाल उठता है कि अगर वो लोगों का अधिक टेस्ट करते तो और कितने अधिक केसों की पहचान कर लेते?

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