अयोध्या में राम मंदिर निर्माण पाकिस्तान को नहीं आ रहा रास, जानें क्या कहा? – Pakistan criticises for starting construction of ram temple in ayodhya

  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पाक ने जताई नाराजगी
  • सीएए, एनआरसी पर भी भारत का किया विरोध

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का काम शुरू हो गया है. उधर पाकिस्तान ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा है कि इससे पता चलता है कि हिंदुस्तान में अल्पसंख्यक किस कदर हाशिए पर हैं.

अभी हाल में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो गया था. पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि केस में अपना अंतिम फैसला सुनाया था. फैसले में विवादित भूमि की पूरी 2.77 एकड़ जमीन रामलला को देने का आदेश हुआ. सुप्रीम कोर्ट में कुल तीन याचिकाकर्ताओं में रामलला भी एक थे. इसी के साथ 5 सदस्यीय सांविधानिक बेंच ने अयोध्या में मस्जिद निर्माण के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को 5 एकड़ जमीन दिए जाने का केंद्र को निर्देश दिया.

इस बीच अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर पाकिस्तान की ओर से बयान आ रहे हैं. पाकिस्तान फॉरेन ऑफिस की ओर से बुधवार को कहा गया कि जब पूरी दुनिया कोविड-19 के संकट से जूझ रही है, ऐसे वक्त में ‘आरएसएस-बीजेपी’ अपने ‘हिंदुत्व’ एजेंडे को आगे बढ़ाने में लगे हैं. पाकिस्तान के बयान में कहा गया है कि ‘अयोध्या में बाबरी मस्जिद स्थल पर 26 मई 2020 को मंदिर निर्माण की शुरुआत इसी दिशा में एक और कदम है और पाकिस्तान की सरकार व यहां के लोग इसकी आलोचना करते हैं.’

पाकिस्तान फॉरेन ऑफिस के बयान में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की भी आलोचना की गई है. बयान में कहा गया है कि बाबरी मस्जिद, नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की शुरुआत जैसे कदमों से पता चलता है कि वहां के अल्पसंख्यक किस कदर वंचित हैं. दूसरी ओर हिंदुस्तान सरकार दुनिया के तमाम देशों को बता चुकी है कि सीएए उसका आंतरिक मसला है और इससे किसी अन्य देश का कोई संबंध नहीं. भारत सरकार ने साफ किया है कि इस कानून का मकसद पड़ोसी देशों के उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों की रक्षा करना है.

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