विदेश मंत्रालय ने कहा, हम कुलभूषण जाधव की जान बचाने की कोशिश करेंगे – Kulbhushan jadhav case mea response pak claims are farce exploring all legal options to save

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  • जाधव पर पाक का दावा दूरगामीः विदेश मंत्रालय
  • ‘जाधव को बचाने को सभी कानूनी विकल्प तलाश रहे’
  • ‘चीनी दूत का नेपाली नेताओं से मिलना आंतरिक मामला’
  • ‘चीन के साथ संबंधों के समग्र विकास को शांति जरुरी’

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि कुलभूषण जाधव की जान बचाने को लेकर हम अपने कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करेंगे. हम उनकी जान बचाने को लेकर प्रतिबद्ध हैं. पाकिस्तान ने एक दिन पहले यह दावा किया था कि जाधव ने रिव्यू पिटीशन दायर करने से इनकार कर दिया है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि हमें पता चला है कि पाकिस्तान की ओर से ऐसा दावा किया गया है कि कुलभूषण जाधव ने रिव्यू पिटीशन दायर करने से मना कर दिया है. जाधव पर पाक का दावा दूरगामी है. भारत जाधव को बचाने के लिए सभी कानूनी विकल्प तलाश रहा है.

इससे पहले पाकिस्तान की जेल में कैद कुलभूषण जाधव के मामले में पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि हम कूटनीतिक माध्यमों से कोशिश कर रहे हैं कि जाधव के मामले में आईसीजे के फैसले को पूर्ण और प्रभावी रूप से लागू किया जाए.

जाधव के रिव्यू पिटीशन लगाने से इनकार के दावे पर विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि यह पिछले चार सालों से चल रहे फरेब का एक सिलसिला है. जाधव को मजाकिया ट्रायल के जरिए फांसी की सजा सुनाई गई. वह पाक सेना के कब्जे में हैं. रिव्यू फाइल करने से इनकार करने के लिए उन्हें स्पष्ट रूप से मजबूर किया गया है. मंत्रालय ने कहा कि भारत ने जाधव तक बेरोक-टोक पहुंच होने की मांग की है ताकि उनके पास मौजूद विकल्पों पर चर्चा की जा सके.

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नेपाल का आंतरिक मामलाः विदेश मंत्रालय

करतारपुर मसले पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि हमारे बीच एक द्विपक्षीय समझौता है और हम वर्तमान में इस संबंध में संबंधित हितधारकों से परामर्श कर रहे हैं.

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पड़ोसी देश नेपाल में राजनीतिक घटनाक्रम और चीनी दूत के साथ नेपाल के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व की बैठक पर विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि यह नेपाल का आंतरिक राजनीतिक मामला है और इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे. मंत्रालय ने कहा कि नेपाल के आंतरिक राजनीतिक और घरेलू मामलों पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे.

‘सीमा पर चीन के साथ शांति बहाली जरुरी’

चीन के साथ सीमा विवाद से जुड़े प्रश्न के जवाब में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि सीमा के सवाल प्रश्न पर भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों (एसआर) भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, और चीन के स्टेट काउंसिलर और विदेश मामलों के मंत्री वांग यी ने 5 जुलाई 2020 को टेलीफोन पर बातचीत की. फिर 6 जुलाई को जारी हमारी प्रेस विज्ञप्ति में उल्लेख किया गया कि 2 विशेष प्रतिनिधियों ने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों से जुड़े पश्चिमी क्षेत्र में हाल के घटनाक्रमों पर विचारों का स्पष्ट और गहन आदान-प्रदान किया.

उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान, एनएसए अजीत डोभाल ने चीन को गलवान घाटी क्षेत्र सहित वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के साथ हाल के घटनाक्रमों पर स्पष्ट रूप से भारत की स्थिति से अवगत कराया. एनएसए डोभाल ने इस संदर्भ में जोर दिया कि भारतीय सैनिकों ने हमेशा सीमा प्रबंधन के प्रति बहुत ही जिम्मेदार रुख अपनाया है और साथ ही, हमारी सेनाएं भारत की संप्रभुता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए गहराई से प्रतिबद्ध हैं.

अपनी बातचीत के दौरान दोनों विशेष प्रतिनिधियों ने इस बात पर सहमति जताई कि सीमावर्ती क्षेत्रों में संयम और शांति द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है. इस संबंध में उन्होंने यह भी दृष्टिकोण साझा किया कि द्विपक्षीय समझौते के अनुसार शांति और शांति की पूर्ण बहाली के लिए भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में एलएसी के पास पूरी तरह से सैनिकों की जल्द से जल्द निगमन सुनिश्चित करना आवश्यक है.

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विदेश मंत्रालय ने कहा कि इन द्विपक्षीय समझौतों में से एक प्रमुख प्रावधान दो पक्षों द्वारा प्रतिबद्धता है जो वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) का कड़ाई से सम्मान और निरीक्षण करेगी. साथ ही दोनों एसआर इस बात पर भी सहमत हुए कि दोनों पक्षों को भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए मिलकर काम करना चाहिए जो सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति भंग कर सकती है.

विशेष प्रतिनिधियों द्वारा सहमति के अनुसार, दोनों पक्षों के राजनयिक और सैन्य अधिकारी सेना के निगमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अपनी बैठकें जारी रखेंगे. वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कनसलटेशन एंड कोआर्डिनेशन ऑन इंडिया-चाइना बॉर्डर अफेयर्स (WMCC) की परामर्श और समन्वय के लिए अगली बैठक जल्द होने वाली है.

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